शंख योग क्या है: फायदे, सावधानियां व पूरी जानकारी।

हेल्लो दोस्तो आज का हमारा लेख स्वास्थ्य के प्रति समर्पित होगा, कहा जाता है की दुनिया में जितनी भी बीमारियां है, ज्यादातर बीमारियां पेट से शुरू होती है। इसी लिए दुनिया भर में लोग विभिन्न प्रकार की दवाइयां, योगासन तथा और भी कई तरीकों से अपने पेट को साफ़ रखने की कोशिश करते है। आज के लेख में हम भी पेट को साफ़ करने के साथ साथ पूरे शरीर को साफ़ करने के एक ऐसे प्राचीन तरीके, शंख प्रक्षालन को देखेंगे।

आज हम जानेंगे की शंख प्रक्षालन क्या है, शंख प्रक्षालन कैसे किया जाता है, शंख प्रक्षालन कब किया जाता है, शंख प्रक्षालन क्यों किया जाता है, इसकी पूरी विधि के साथ समय समय पर काम में ली जाने वाली सावधानियों के साथ आज हम शंख प्रक्षालन के बारे में विस्तार से जानेंगे।
तो चलिए शुरू करते है-

शंख प्रक्षालन क्या है / शंख योग क्या है

शंख योग क्या है इसके जवाब निम्न है –

• शंख प्रक्षालन या शंख योग एक प्रकार के योगासन की विधि है जिसके जरिये मुंह से लेकर पेट तक की गंदगी को गुदा द्वार से बहार निकल दिया जाता है।

शंख योग क्या है पूरी जानकारी
शंख योग क्या है पूरी जानकारी

अगर शाब्दिक अर्थ पर जाए तो-

यहाँ पर शंख आतों के सन्दर्भ में कहा गया है, और प्रक्षालन का जगजाहिर मतलब “धोना” होता है अर्थात, आंतों को धोने की अभिक्रिया को शंख प्रक्षालन कहते है।

• आपके मन में विचार आ रहा होगा की आंतों को धोया कैसे जा सकता है, तो जी हाँ यह एक प्राचीन अभिक्रिया है जिसमे कुछ 4 प्रकार के योगासन के जरिये आंतों को धोया जा सकता है, इसके लिए किसी प्रकार के ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं होती है।

• सुनने में बड़ा अजीब सा लगता है कि आंतो को कैसे धोया जा सकता है लेकिन हमारे पूर्वजों ने यह अभिक्रिया की खोज हजारो वर्षों पहले ही करली थी जिसके सहायता से उनका शरीर स्वस्थ रहता था और एक स्वस्थ शरीर लम्बी अवधि तक जीवित रहता ही है।

• शंख प्रक्षालन के जरिये शरीर की गंदगी को गुदा द्वार से बहार निकला जाता है और इस प्रक्रिया को वरिसार भी कहा जाता है इसलिए इस पूरी अभिक्रिया को वरिसार क्रिया भी कह सकते है।

• शंख प्रक्षालन के जरिये हमारा शरीर कीटाणुओं, गंदगी, पेट के कीड़ों, और भी हानिकारक विषैले पदार्थों को बहार निकल फेकता है।

शंख प्रक्षालन कैसे किया जाता है

• जब भी आप शंख प्रक्षालन करने का ठाने तो याद रखे आपको यह सुबह को करना है।

• इससे तकरीबन 6 से 10 घंटे पहले पानी को बहुत सारा उबालकर उसमे नमक मिलकर एक पूरी रात के लिए छोड़ देना है नमक इतना हल्का मिलाना है कि केवल नमक का नाम मात्र सा ही स्वाद आना चाहिए पूरा पानी अच्छा ख़ासा नमकीन नहीं होना चाहिए।

• याद रखे यह प्रक्रिया पानी के जरिये पेट को साफ़ करने के लिए है इस लिय यह जरूरी है की आप एक दम साफ़ पानी काम में लें। यदि ऐसा नहीं हुआ तो जो पानी आपके वास्थय को बढ़िया बनाने के लिए काम में आने वाला है वह आपके स्वास्थ्य को खराब भी बना सकता है। ऐसा पानी जिसमे कीटाणु भरें हों, वह यदि आपकी आंतो में जाएगा तो ऐसा पानी हो सकता है आपके किसी पुरानी रोग को ही बढ़ा दे या फिर किसी नए रोग को उत्पन्न भी कर सकता है।

• शंख प्रक्षालन शुरू करने के लिए सबसे पहले तो कागासन/उकडू की अवस्था में बैठ जाये इसके ठीक बाद आपको कम से कम 1 से डेढ़ गिलास पानी पीना है।

• वह पानी आपके मुह से होते हुए आमाशय में जायेगा, अमाशय से छोटी आंत में आएगा, छोटी आंत से बड़ी आंत में जायेगा, और वहा से होते हुए आपके गुदाद्वार तक पहुंचकर वहा से बाहर निकल जायेगा।

• जब आप कोई भी चीज़ खाते है तो वह चीज़ बहुत धीरे धीरे निचे जाती है, लेकिन जब आप कागासन की अवस्था में होते है तो आपके आमाशय से आगे के द्वार थोड़े शीघ्रता से खुलते है जिसके वजह से पानी जल्दी ही गुदाद्वार तक पहुँच जाता है।

• लेकिन सिर्फ कागासन ही नहीं है जो इस प्रक्रिया को समाप्त करता है। शंख प्रक्षालन या शंख योग के लिए आपको चार प्रकार के आसन करने होते है जिनका नाम क्रमशः ताड़ासन, कटिकचक्रासन, भुजंगासन, उदारकृष्णासन है यह सभी आसन कैसे करने है यह आप गूगल पर देख सकते है या किसी भी तरह से आपको पता चल जायेगा।

• यह सभी आसन आपको 5-5 बार करने है, इससे आपका एक बार शंख प्रक्षालन या शंख योग पूरा हो जायेगा, ऐसे आपको 5 बार शंख योग या शंख प्रक्षालन करना है। और हर शंख प्रक्षालन के बाद आपको 3-4 गिलास पानी धीरे धीरे पीना है।

• 5 बार शंख प्रक्षालन करने पर आपकी शंख प्रक्षालन की अभिक्रिया का असर दिखने लगेगा और आपका सारा मल गुदा द्वार से बहार निकल जायेगा।

• जब आप शंख प्रक्षालन 5 वीं बार कर रहे होंगे उस समय तक आपके गुदा द्वार से साफ़ पानी बहार आ जायेगा जिसका मतलब यह होगा की आपका शंख प्रक्षालन सफल हुआ।

शंख प्रक्षालन के लाभ/फायदे

• अक्सर सुना जाता है की सभी बीमारियां पेट से शुरू होती है तो शंख प्रक्षालन आपके पेट को अच्छी तरीके से साफ़ कर देता है। जिससे स्थित बीमारी या होने वाली बीमारियों से बचा जा सकता है।

• शंख प्रक्षालन के जरिये आपके ना सिर्फ पेट की बल्कि सारे शरीर की गंदगी भी बहार आजाती है जिसे आपके शरीर में नहीं रहना चाहिए।

• इस प्रक्रिया से पेट के कीड़े गुदा द्वार से बाहर आ जाते है।

• शंख प्रक्षालन की प्रक्रिया या शंख योग आपके डायबिटीज की और दिल की बीमारी में भी फायदेमंद होती है।

• यह पथरी नहीं बनने देता।

• जो लोग लंबी साधनाए करते है उन्हें यह जरूर करना चाहिए।

शंख प्रक्षालन में ध्यान रखी जाने वाली सावधानियां

• जिन लोगों को हाई ब्लडप्रेशर या डायबिटीज की शिकायत है उन्हें नमक का पानी नहीं, नीम का पानी (नीम की मुट्ठीभर पत्तियों को पानी में उबालकर) यह प्रक्रिया करनी चाहिए इसका सेवन करना चाहिए।

• जिन लोगों के पेट में अल्सर हो उन्हें इस प्रक्रिया को केवल डॉक्टर की सलाह से करना चाहिए और डॉक्टर मना करे तो नहीं करना चाहिए।

• कभी भी शंख योग के बाद ठन्डे ठन्डे पानी से नहीं नहाना चाहिए, वरना तुरंत बीमार पड़ जायेंगे।

• कुंजल अभिक्रिया का भान रखे और जब भी शंख योग करे, उसके बाद कुंजल क्रिया जरूर से ही करे। इससे यदि नमक का कोई अंशमात्र भी आपके आमाशय में रहा होगा तो वजह भी बाहर आजायेगा।

FAQ

शंख योग क्या है?

योग एक प्रकार का योगा अभ्यास है जो शरीर के पेट से संबंधित बीमारियों को दूर करता है।

शंख प्रक्षालन कितनी बार करना चाहिए?

शंख प्रक्षालन आवश्यकता पढ़ने में महीने में सिर्फ एक या एक से दो बार ही करना चाहिए।

शंख प्रक्षालन किस प्रकार लाभदायल है?

शंख प्रक्षालन करने से पेट से मुँह तक गंदगी साफ हो जाती है। जिससे शरीर मे आने वाली बीमारियों से निज़ात मिलती है।

Conclusion

तो आज के लेख में हमने जाना की शंख योग क्या होता है, शंख योग के फायदे व पूरी जानकारी। सही शंख योग के सारे पहलुओं पर हमने चर्चा करी। यदि आपको हमारा लेख पसंद आया तो कृपया इसे अपने मित्रों व सगे सम्बन्धियों तक जरूर शेयर करे।

Leave a Comment